बदलाव : अब बेटियां भी दिला रहीं माता-पिता को मोक्ष

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रांची : हाल में कई ऐसी खबरें सामने आयीं जिसमें बेटियों ने अंतिम संस्कार की विधि संपन्न की. गौर करने वाली बात यह रही कि ना सिर्फ उच्च वर्ग में यह बदलाव देखने को मिला है, बल्कि आम लोग भी इस बदलाव को सहजता से स्वीकार कर रहे हैं. हालिया मामला रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड का है, जहां एक समाजसेवी राधानाथ महथा के निधन के बाद उन्हें मुखाग्नि उनकी एकमात्र संतान उनकी पुत्री ने दी. 30 अगस्त को झारखंड के कार्यवाहक मुख्यन्यायाधीश प्रशांत कुमार का निधन हुआ था, उनका अंतिम संस्कार भी उनकी पुत्री ने ही किया था. यह चंद उदाहरण हैं, इसके अतिरिक्त पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन के बाद भी उनके अंतिम संस्कार की विधि उनकी पुत्री बांसुरी ने ही पूरी की थी. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अंतिम संस्कार भी उनकी पुत्री नमिता ने किया था. आज समाज काफी बदल चुका है और माता-पिता अपनी बेटियों को भी उसी तरह से पालते हैं जैसे बेटों को. इसलिए वे भी अपनी बेटियों को यह अधिकार देना चाहते हैं. हालांकि अभी भी ऐसी घटनाएं आम नहीं हैं, लेकिन इसे सामाजिक स्वीकार्यता मिल रही है, यह भी एक सच्चाई है....

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