अयोध्या का सिंहासन त्याग राम को मनाने निकले भरत

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रामनगर। अयोध्या का सिंहासन त्यागकर भरत भगवान राम को मनाने के लिए वन को चल पड़े। उन्होंने अपनी माता कैकेई की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। भरत को आता देखकर निषादराज को भ्रम हो जाता है कि भरत आक्रमण करने आ रहे हैं। गुरु वशिष्ठ भरत को बताते हैं कि यह राम के मित्र हैं। निषाद राज भरत को लेकर सभी के साथ गंगा के तट पर पहुंचते हैं। गंगा पार करके सभी प्रयाग पहुंचते हैं। रामनगर की रामलीला के 11 वें दिन रविवार को श्री अवध में भरतआगमन, सभा, चित्रकूट प्रयाण, निषाद मिलन, गंगावतरण, भारद्वाज आश्रम की लीलाएं हुईं।...

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