आतंक को लेकर इमरान🗣️ ने कबूलीं पाकिस्तान🇵🇰 की करतूत

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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने सोमवार को काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशंस में कई मुद्दों पर बात की। इस दौरान उन्होंने मोदी-ट्रंप की रैली और पीएम मोदी के जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 पर हटाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इमरान ने वैश्विक मंच पर ये कबूल किया की पहले की पाकिस्तानी सरकारों ने तालिबान के साथ मिलकर आतंक को दुनिया भर में बढ़ावा दिया। उन्होंने अमेरिका के ऊपर पाकिस्तान के साथ मिलकर आतंक को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया।

पाकिस्तानी पीएम इमरान खान के लिए शर्मिंदगी भरे साबित हुए इस कार्यक्रम में उन्हें एक के बाद एक शर्मिंदगी भरे सवाल झेलने पड़े। वे आतंक को लेकर अपनी असफलताओं का ठीकरा अमेरिका पर ही फोड़ते रहे। पाक को आतंक के आरोपों से बचाने के दौरान इमरान ये भी भूल गए थे कि वे खुद अमेरिका में ही बैठे हुए हैं और लगातार उसे आतंक का पोषक बता रहे हैं।

सोमवार शाम पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान अमेरिका की काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशंस के अध्यक्ष रिचर्ड एन हास के साथ बातचीत कर रहे थे। सबसे पहले इमरान खान से पूछा गया कि क्या चीन के द्वारा पाक को दी जा रही मदद से पाक के कर्ज में बढ़ोत्तरी नहीं होगी और उसकी संप्रभुता के खतरा नहीं पहुंचेगा? इस सवाल के जवाब में इमरान खान ने कहा, 'जब भी हमारे सामने वाकई बेहद खराब परिस्थितियां आईं तो चीन ने हमारी मदद की और इसके साथ ही हमेशा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने भी हमेशा हमारी मदद की।'

अमेरिका-पाकिस्तान के संबंधों पर जब इमरान खान से पूर्व अमेरिकी रक्षा मंत्री मैटिस के पाकिस्तान के कट्टरपंथी स्थानों में सबसे खतरनाक होने की टिप्पणी पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी गई, तो इस सवाल के जवाब में इमरान खान ने कहा, 'मैं मानता हूं कि वे नहीं समझते कि क्यों पाकिस्तानी कट्टरपंथी रहा? 1980 में पाकिस्तान ने अमेरिका की मदद से जिहाद के लिए सोवियत के खिलाफ प्रतिरोध विकसित किया। जिहाद को रीगन ने भी महान बताया था...'

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