गंगा का जलस्तर ठहरा, दुश्वारियां नहीं हो रही कम

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सीतामढ़ी। गंगा की उफनाती लहरें खतरे के निशान के करीब पहुंचकर रविवार को स्थिर हो गईं, लेकिन बाढ़ ग्रस्त इलाकों में पानी के बीच घिरे लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। तीन ओर नदी से घिरे कोनिया क्षेत्र के 13 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इससे गांव में जनजीवन पर बुरा प्रभाव पड़ा है, लेकिन घरों में पानी घुसने से दो परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है।

करीब एक सप्ताह पूर्व से बढ़ रहा गंगा नदी का जलस्तर रविवार को सुबह ठहर गया। नदी के जलस्तर में ठहराव और दोपहर बाद जलस्तर में एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की हो रही जलस्तर में कमी के बाद भी समस्याएं कम नहीं हो रही। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी कार्यालय के अनुसार गंगा के जलस्तर में पांच सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है। वर्तमान में गंगा का जलस्तर 80. 420 मीटर पर आ गया है। हालांकि यह जल स्तर बहुत अधिक है। जिससे तटवर्ती गांव के लोगों ने राहत की सांस ली। लेकिन जिन गांवों में पानी भरा है वहां के लोगों की समस्याएं बढ़ गई है। गंगा बाढ़ का सबसे अधिक प्रभाव किसानों के बाजरे और अरहर की फसलों पर पड़ा है। कोनिया क्षेत्र में बड़े भू-भाग पर बाजरा, अरहर, ज्वार आदि फसलों की खेती चौपट होने की कगार पर पहुंच गई है। कोनिया के किसानों का कहना है कि धान की फसल को छोड़ दे तो किसी भी अन्य फसलों में गंगा का पानी आने के बाद कुछ दिनों बाद वह फसल बर्बाद हो जाती है। क्षेत्र के कलातुलसी, धनतुलसी, हरिरामपुर ,गजाधरपुर, भुर्रा ,छेछुआ ,कलिक मवैया , बसगोती मवैया, मवैया थान सिंह, इटहरा ,डीघ आदि गांवों में किसानों की की फसलें गंगा बाढ़ की चपेट में आ गई है। जिससे किसानों के सामने बड़ी समस्या पैदा होती जा रही है। किसानों का कहना है कि उनकी फसलों को बाढ़ के पानी से बहुत अधिक नुकसान हुआ है। इसलिए सरकार को फसलों का मुआवजा किसानों को तत्काल देना चाहिए।...

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