जैन इतिहास में नर्मदा तट को माना जाता है वैराग्य साधना का पवित्र स्थान...

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देवास. अपने-अपने क्षेत्र की अपनी-अपनी विशेषता रहा करती है। सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर भी अपनी-अलग विशेषता रखता है। जहां जैन इतिहास में नर्मदा तट को वैराग्य साधना का पवित्र स्थान माना जाता है वहीं सनातन संस्कृति में भी नर्मदाजी का एक विशिष्ट स्थान है। नर्मदा अमरकंटक से निकलती है। उसका नाभिकुंड नेमावर को ही माना जाता है। उक्त विचार आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज ने रविवारीय प्रवचन के दौरान व्यक्त किए। प्रवचन के अंत में दिल्ली में समाधिस्थ राष्ट्रसंत आचार्यश्री विद्यानंदजी महाराज को णमोकार मंत्र का जप कर विनयांजलि दी गई।

आचार्यश्री ने कहा कि इंदौर प्रतिभास्थली के लिए बड़ी सं?या में दानदाताओं ने दान की घोषणा कर मंगलाचरण किया है, यह नेमावर सिद्ध क्षेत्र से एक बहुत अच्छी शुरुआत है। आप लोग दान दे रहे हैं, दे सकते हैं। हम तो सिर्फ आशीर्वाद दे सकते हैं। आपके दान से स्कूल नहीं, विद्यालय का निर्माण होने जा रहा है। जिस तरह भारत में निर्मित पहला उपग्रह रूस से छोड़ा गया था वैसे ही आज इंदौर के लिए एक अच्छे प्रकल्प की शुरुआत सिद्धोदय नेमावर की इस पवित्र भूमि से होने जा रही है। इंदौर वालों को बांधना आसान नहीं था, लेकिन इस प्रतिभास्थली ने सभी को एक रूप में बांध दिया है। आचार्यश्री ने कहा कि महानगर इंदौर के लोग मंगलाचरण करने आज यहां आए हैं। आगे का इतिहास इसी मंगलाचरण से इंदौर के लिए बनने वाला है। सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने सभी दान-दाताओं का स?मान किया। रविवार को करीब दस हजार श्रद्धालु उपस्थित रहे। इंदौर से ५१ बसों व २०० से अधिक छोटे वाहनों से लोग नेमावर पहुंचे। प्रवचन के अंत में सभागार में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने दिल्ली में समाधिस्थ राष्ट्रसंत आचार्यश्री विद्यानंदजी महाराज को णमोकार मंत्र का नौ बार जप कर विनयांजलि दी।...

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