जयंती विशेष: यहीं लिखी गई थी राष्ट्रकवि दिनकर के मन मानस से "रश्मिरथी"

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पूर्णिया. पूरा राष्ट्र आज राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' (Ramdhari Singh Dinkar) की 111वीं जयंती मना रहा है. 'दिनकर' की महान कृतियों में रश्मिरथी (Rashmirathi) भी शामिल है. हिंदी पद्य साहित्य की महान कृति "रश्मिरथी" की सभी पंक्तियां राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' ने बिहार में ही लिखी थीं. साल 1950 में पूर्णिया कॉलेज (Purnia College) पूर्णिया के पुस्तकालय कक्ष में साहित्य साधना कर दिनकर ने रश्मिरथी लिखी थीं. तब पूर्णिया कॉलेज पूर्णिया (Purnia) के प्रथम प्राचार्य और हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार जनार्दन प्रसाद झा द्विज दिनकर के मित्र और मार्गदर्शी होते थे.

शांत वातावरण से था लगाव

जानकार बताते हैं कि 'दिनकर' जी को पूर्णिया के शांत वातावरण और कवि द्विज जी से बड़ा लगाव था, इसी वजह से उन्होंने यहां रश्मिरथी की रचना की. पूर्णिया कॉलेज का यह पुस्तकालय दिनकर जी और उनकी रचना 'रश्मिरथी' की याद यहां के लोगों को हर दिन दिलाता है. उस समय पूर्णिया कॉलेज का पुस्तकालय कक्ष अंदर से एकांत और अंधेरा से घिरा रहता था लेकिन इसमें ऊपर बने रोशनदान से गिरती रौशनी हालात को शांत और सर्जक कक्ष बनाती थी इसका लाभ रामधारी सिंह 'दिनकर' ने भी लिया. अब इस पुस्तकालय कक्ष को कॉलेज ने अपनी धरोहर घोषित कर उसका संरक्षण किया है....

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