ज्यादातर घरों से चूल्हे ठंडे, लंगर में हो रहा गुजारा

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औरैया। तकरीबन सप्ताह भर से उफनाई यमुना का जलस्तर रविवार को घटकर खतरे के निशान 113 मीटर से नीचे 110 मीटर पर पहुंच गया है। इससे नदी के किनारे बसे बाढ़ से प्रभावित गांवों के बाशिंदों ने राहत की सांस जरूर ली है, लेकिन उनकी दुश्वारियां अभी कम नहीं हुई हैं।

गांवों में पानी भरने से ज्यादातर घरों में चूल्हा अभी भी ठंडा पड़ा है। ऐसे में गांव वालों को जिला प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे लंगर का ही सहारा है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद सड़कों पर कीचड़ ही कीचड़ दिखाई दे रहा है। कई घरों की जमीन धंसने से लोगों का काफी नुकसान हुआ है। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से पीड़ितों की क्षति का आंकलन करने के लिए लेखपालों को निर्देश दिए गए हैं, जिससे शासन स्तर से बाढ़ पीड़ितों की मदद कराई जा सके। ‘अमर उजाला’ की टीम ने रविवार को बाढ़ प्रभावित गांव अस्ता का जायजा लिया तो कमोबेश कुछ ऐसी ही तस्वीर सामने आई।...

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