तखलीक के लिए जरूरी है असरार कायम रहना : शीन काफ़ निज़ाम

  |   Jaipurnews

'जो तखलीक (रचना) जितनी देर तक अपना असरार (रहस्य) कायम रख सकती है, वह उतनी ही देर तक ज़िंदा रह सकती है। जिस तखलीक का असरार ताबीर की गिरफ्त में आ जाता है, वह तारीख़ का हिस्सा बन कर रह जाती है।'

यह बात मशहूर शायर शीन काफ़ निज़ाम ( Sheen Kaaf Nizam ) ने रविवार को जेकेके ( JKK jaipur ) के रंगायन सभागार ( JKK Rangayan ) में सेमिनार के तीसरे इजलास के बाद पूरी सेमिनार पर अपनी बात रखते हुए कही।

अज़ीम शायर निज़ाम ने महाभारत ( Mahabharat ) के बर्बरीक ( Barbarik ) प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह बर्बरीक ने पूरी जंग में सिर्फ सुदर्शन चक्र को ही चलते देखा था, उसी तरह इन दो दिनों में सिर्फ ग़ालिब ही नज़र आ रहे थे। वो इतने बड़े शायर थे कि उन पर गुफ्तगू करने बैठें तो दो दिन में कुछ हो ही नहीं सकता, और फिर 'इक्कीसवीं सदी में ग़ालिब' पर तो बात मुकम्मल करना और भी मुश्किल है।...

फोटो - http://v.duta.us/hUjfbQAA

यहां पढें पूरी खबर— - http://v.duta.us/Rx7VTwAA

📲 Get Jaipur News on Whatsapp 💬