नदियों का थमा उफान, पर खतरा अब भी बरकार

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मंझनपुर। यमुना के जल स्तर में भले ही गिरावट हो रही हो, लेकिन खतरा अभी भी बरकरार है। केन, बेतवा और चंबल नदीं का पानी अगर असर किया तो हालात फिर से बेकाबू हो सकते हैं। हालांकि अफसरों का दावा है कि जितना पानी उन नदियों में छोड़ा गया है वह कोई खास असर नहीं डालेगा। फिलहाल अभी भी गंगा और यमुना खतरे के निशान से ऊपर ही बह रही हैं।

एक सप्ताह से गंगा और यमुना नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। गंगा का तो जिले में कोई खास असर नहीं रहा लेकिन यमुना ने तराई के गांवों में दहशत फैला दी। दर्जन भर के करीब गांव नदी के पानी से घिर गए। गढ़वा, बड़हरी, मल्हीपुर आदि गांवों के हालत काफी खराब हो गए। प्रशासन के लोगों को गढ़वा गांव से करीब 14 परिवारों को शरणार्थी कैंप में भेजना पड़ा। इन लोगों के घरों में बाढ़ का पानी भर गया था। इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता जगदीश लाल का कहना है कि रविवार से जल स्तर की बढ़ोत्तरी पर रोक लग चुकी है। फाफामऊ में गंगा का जल स्तर सुबह 85.74 सेमी व नैनी में यमुना का जल स्तर 85.59 सेमी रहा। सुबह छह बजे के बाद से यमुना के जल स्तर में बढोत्तरी नहीं हुई। इसी तरह सुबह आठ बजे के बाद से गंगा का पानी भी स्थिर हो गया। एक्सईएन का कहना है कि बेतवा में 35 क्यूसेक, केन में 32.778 और चंबल नदी में 249.116 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस पानी से फिलहाल कोई खास फर्क पड़ने वाला नहीं है।

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