फोटो पर्मकैथ डायलसिस करने की आधुनिक तकनीड तकनीक

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देहरादून। टनल सेंट्रल कैथेटर इन्सरशन बाई अल्ट्रासाउंड तकनीक मेडिकल साइंस की आधुनिक तकनीक है। इसके तहत मरीज के गले में पर्मकैथ नली डाल कर डायलसिस किया जाता है। पर्मकैथ नली से किया जाने वाला डायलसिस उन मरीजों के लिए राहत भरा है जिनके शरीर पर किसी कारणवश फिस्टुला नहीं बनाया जा सकता है।

यह बात श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में रविवार को आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहीं। वर्कशाप में देहरादून के 15 नैफ्रोलॉजिस्ट और फिजीशियन ने भाग लिया। मुख्य वक्ता पीजीआई चंडीगढ़ के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मनीष राठी ने पर्मकैथ नली द्वारा डायलसिस किए जाने की अत्याधुनिक विधियों की जानकारी दी। डॉ. राठी ने बताया कि नेफ्रोलॉजिस्ट टनल सेंट्रल कैथेटर इन्सरशन बाई अल्टासाउंड तकनीक को डायलसिस के दूसरे विकल्प के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। कार्यशाला में डॉ. आलोक कुमार, डॉ. विवेक रोहिला, डॉ. विक्रम सिंह, डॉ. एएन पांडेय, डॉ. डोरचम ख्राइम आदि उपस्थित रहे।

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