यहां सजती है बच्चों की मंडी, मां-बाप लगाते बेटों की बोली, तब घरों में जलता है साल भर चूल्हा

  |   Shivpurinews

बदरवास/शिवपुरी/ सरकार भले ही आदिवासियों के उत्थान के लाख दावे करती हो, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी इस समाज के लोग इतने गरीब हैं कि अपने कलेजे के टुकड़े को गिरवीं रखकर पेट की ज्वाला शांत करने को मजबूर हैं। #KarjKaMarj सीरीज में हम आपको ऐसे ही किसानों और आदिवासियों का दर्द दिखा रहे हैं। कोई कर्ज से बचने के लिए अपने बेटे को गिरवी रख रहा है तो किसी ने साहूकारों के कर्ज को चुकाने के लिए घर गिरवी रख परिवार को छोड़ दिया।

दरअसल, शिवपुरी जिले स्थित बदरवास के ग्राम मुढ़ेरी सहित राजस्थान बॉर्डर पर कई ऐसे गांव हैं, जहां रहने वाले गरीब आदिवासी परिवार अपने किशोर बच्चों को राजस्थान से आकर ऊंट व भेड़ चराने वालों के हाथों गिरवी रख देते हैं। पांच हजार रुपए महीने में सौदा तय करके अपने बच्चे को उस भेड़ मालिक के साथ जंगल में पहुंचा देते हैं। पांच से छह माह तक वो बच्चा उस भेड़ मालिक के मवेशियों को चराता है और यदि किस्मत रही तो वापस घर भी आ जाता है, अन्यथा कई बार तो बच्चे जंगल में रहते हुए किसी जहरीले जीव-जन्तु का शिकार होकर मर भी जाते हैं।...

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