रावणा राजपूत समाज ने निकाली वाहन रैली

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डीडवाना. शहर की लाडनंू रोड स्थित रावणा राजपूत छात्रावास में सोमवार को हाइफा हीरो मेजर दलपतसिंह शेखावत का 101वां बलिदान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर रावणा राजपूत समाज के लोगों ने मेजर दलपतसिंह की प्रतिमा के आगेे दीप प्रज्जवलित कर पुष्प अर्पित किए। दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धासुमन भी अर्पित किए। राष्ट्रीय चामुंडा सेना तहसील अध्यक्ष भवानीसिंह ने बताया कि कार्यक्रम में सैकड़ों समाज बंधु एवं युवा मौजूद रहेंं। कार्यक्रम की शुरूआत में वक्ताओं ने हाइफा हीरो मेजर दलपतसिंह के जीवन के बारे में बताया। वक्ताओं ने समाज के युवाओं व विद्यार्थियों मेजर दलपतसिंह की तरह साहस का परिचय देते हुए समाज एवं देश हित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। वक्ताओं ने कहा कि मेजर दलपतसिंह ने प्रथम विश्वयुद्ध में जोधपुर की सेना की तरफ से तुर्की सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। इस लड़ाई में दलपतसिंह ने अपने साहस व धैर्य के साथ तुर्की की सेना को शिकस्त दी। विक्रमसिंह आकोदा ने शहीद मेजर दलपतसिंह देवली के बारे में बोलते हुए कहा कि दलपतसिंह का जन्म जोधपुर के देवली गांव में 26 जनवरी 1892 को कर्नल हरीसिंह शेखावत के यहां हुआ था। इनके पिता पोलो खिलाड़ी थे। इनकी शिक्षा-दिक्षा जोधपुर शहर में ही हुई। अपने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देने के कारण इन्हें मिलिट्री क्रॉस से भी नवाजा गया था। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि शहीद कभी मरते नहीं वरन अमर हो जाते है। वक्ताओं ने कहा कि सम्मान में त्रिमूर्ती सर्किल देश की राजधानी में स्थित है। जोधपुर एवं पाली शहर में मुख्य चौराहे पर अश्वारूढ मूर्ति स्थापित है। वहीं 23 सितम्बर को इजरायल एवं भारतीय सेना द्वारा हेफा दिवस के रूप में यह दिवस मनाया जाता है। वर्तमान सरकार ने सरकारी स्कूलों में कक्षा 9वीं के पाठयक्रम में हेफा हीरो मेजर दलपतसिंह की जीवनी के वृतांत को देश के अमर शहीदों की सूची में सम्मलित किया गया है।...

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