सुख-दुख का क्रम जारी रहता है

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नागौर. जैन संत पाŸवचंद्र महाराज ने कहा कि संसार सुख-दुख का क्रम जारी रहता है। सुख और दुख दिन-रात के समान आते और जाते रहते हैं।वह रविवार को जयमल जैन पौषधशाला में जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि संसार में कोई भी जीव एकांत सुखी नहीं बन सकता है। हर जीव को अपने पूर्व उपार्जित कर्मों के फल अनुसार सुख और दुख भोगने के लिए बाध्य होना पड़ता है। एक क्षण का दुख वर्षो के सुख को भुला देता है। सुख में समय जल्दी बीतता है, जबकि दुख में हर क्षण लंबा लगता है। हर परिस्थिति में संतुलन बनाए रखना ही सच्ची साधना है । लाभ- अलाभ, सुख-दुख, जीवन-मृत्यु, निंदा-प्रसंसा, मान-अपमान, इन पांच द्वंद में समत्व का गुण होना जरूरी है। जीवन में चाहे कैसे भी उतार-चढ़ाव आए तनाव की स्थिति में ना जाते हुए उसे झेलने की क्षमता होनी चाहिए।...

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