सपा के मजबूत किले को भेदना विरोधी दलों की बड़ी चुनौती

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रामपुर। समाजपार्टी नेता आजम खां का रामपुर गृह जनपद है। उन्होंने सियासत में रामपुर को सपा के किले के रूप में खड़ा किया। यही वजह है जो वह यहां से नौ बार विधायक रहे हैं। उन्होंने सांसद बनने के बाद विधानसभा से जरूर इस्तीफा दे दिया है, लेकिन रामपुर से किसी भी दल के लिए जीत हासिल करना एक बड़ी चुनौती है। खासकर, भाजपा और बसपा के लिए। क्योंकि, दोनों ही दल आज तक यहां से जीत हासिल नहीं कर सके हैं।

एक वक्त में रामपुर को कांग्रेस के गढ़ के रूप में जाना जाता था। यहां सिर्फ नवाब परिवार का ही रसूख था। फिर चाहे लोकसभा का चुनाव हो या फिर विधानसभा चुनाव। हर चुनाव में आजादी के बाद दशकों तक नवाब परिवार के सदस्य ने ही जीत दर्ज की। इसके बाद भी नवाब परिवार के बाहर के सदस्य की जीत में नवाब परिवार की भूमिका अहम रहती थी। लेकिन, नगर विधानसभा चुनावों में नवाब परिवार के वर्चस्व को मोहम्मद आजम खां ने 1980 में जीत दर्ज कर तोड़ा था। इस जीत के साथ ही वो अब तक नगर विधानसभा से वो नौ बार विधायक बने। आजम खां ने भले ही सियासत की शुरुआत छात्र राजनीति से की हो, लेकिन पहला चुनाव में 1977 में लड़ा। वह रामपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरे। हालांकि, इसमें उन्हें जीत हासिल नहीं हो सकी थी। 1980 में एक बार फिर किस्मत आजमाई और इस बार वह विधायक बन गए। इसके बाद वह 1985 और 1989 के चुनाव में भी जीत हासिल करने में कामयाब रहे। 1989 में प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सरकार बनीं, तो उसमें आजम खान को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इसके बाद 1991 और 1993 में हुए चुनाव में भी आजम खां विजयी हुए।...

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