72 ताबूतों का मंजर देख सिसक उठे अजादार

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वाराणसी। लाट सरैया स्थित सदर इमामबाड़ा में करबला के 72 शहीदों के ताबूत का मंजर देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। जब हजरत इमाम हुसैन के नौजवान बेटे अली अकबर का ताबूत और छह माह के मासूम अली असगर का गहवारा निकला तो अजादार सिसक उठे। मंजर को देखकर हर अजादार की आंखों के आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे। इमामबाड़े से एक के पीछे एक निकले ताबूत का बोसा लेने के लिए अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ पड़ा। जायरीनों ने ताबूतों पर फूलमाला व चादरें चढ़ाकर मन्नतें मांगी।

पुरनम आंखों, गमगीन माहौल और या हुसैन की सदाओं के साथ कर्बला के शहीदों के ताबूत की जियारत के लिए हजारों की संख्या में जायरीन उमड़े। जीशान आजमी ने हर एक ताबूत का परिचय कुछ इस अंदाज में कराया कि हर आंख से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। जनाब कौसेन सुल्तानपुरी एवं मुंबई से तशरीफ लाए हुए नौहाख्वान जनाब जहीर अब्बास ने नौहों से माहौल को और गमगीन बना दिया। अंजुमन आबिदिया चौहट्टा लाल खां की देखरेख में आयोजित कार्यक्रम का आगाज कारी आबिद अब्बास के द्वारा कुरान ए पाक की तेलावत से हुआ। इसके बाद मशहूर शायर रिजवान बनारसी एवं रफीक जलालपुरी ने कलाम पेश किया। शायर सलीम बलरामपुरी ने कलाम से करबला के शहीदों को अकीदत पेश करते हुए कहा कि करबला में देखकर सिब्ते पयंबर का मिजाज, ढल गया था एक सांचे में बहत्तर का मिजाज। दिल्ली के शायर आसिफ जलाल बिजनौरी ने भी कलाम पेश किया।...

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