कभी चंदा मामा, तो कभी प्रियतम का अक्स बन लुभाता है चांद

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रांची : हम सबने बचपन से चांद को देखा है, बचपन में चंदा मामा के नाम पर मां से खूब लोरियां सुनी हैं, उसे दिखा-दिखाकर मां ने खाना भी खिलाया है. वही चंदा मामा युवावस्था में प्रियतम और प्रेयसी का रूप भी ले लेता है. किसी को चांद में प्रियतम का अक्स दिखता है तो किसी को चांदनी में अपनी प्रेमिका.

चांद के प्रति इसी लगाव के कारण हमारे देश में कहानी, कविताओं और बॉलीवुड की फिल्मों में भी चांद को केंद्र में रखकर कई रचनाएं गढ़ी गयी हैं. जो हमें खुशी भी देती हैं और मन को सुकून भी. चांदनी रात में कई प्रेमी जोड़े जीने-मरने की कसमें खाते हैं और चांद उनके प्रेम का गवाह बनता है....

फोटो - http://v.duta.us/IvShQAAA

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