गलन रोग की चपेट में अरबी की फसल

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इन दिनों क्षेत्र में अरबी की फसल गलन रोग की चपेट में है। करीब 50-60 प्रतिशत फसल पूरी तरह से रोग की चपेट में आकर तबाह हो चुकी है। काश्तकारों को आर्थिकी का संकट सताने लगा है। काश्तकारों का आरोप है कि बीते तीन साल से फसल रोग की चपेट में आ रही है। बावजूद इसके विभाग इस ओर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठा रहा है।

मालूम हो कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अरबी की फसल की पैदावार की जाती है। यहां की अरबी की विकासनगर, सहारनपुर, अंबाला, दिल्ली, यमुनानगर, मेरठ, मुज्जफरनगर, मुरादाबाद, गाजियाबाद की मंडियों में खासा डिमांड रहती है। लेकिन, बीते तीन साल से फसल रोग की चपेट में आ रही है। जिससे काश्तकारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। क्षेत्र के अलसी, सकनी, ककाड़ी, नेवी, उद्पाल्टा, समाल्टा, पानुवा, कोठा तारली, कनबुआ, सुरेऊ, भंजरा, चिबऊ, खमरोली, दातनू-बडनू, डामठा, थतेऊ, समाल्टा, पंजिया साहिया छानी समेत 80 से अधिक गांव में अरबी की फसल की बंपर पैदावार की पैदावार की जाती है। काश्तकार चतर सिंह तोमर, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, खजान सिंह चौहान, टीकम सिंह चौहान आदि का कहना है कि पहले अरबी के पत्तों पर काले धब्बे दिखाई देते हैं। जिसके बाद पूरा पौधा गल कर मुरझा जाता है। जिसका सीधा असर अरबी के उत्पादन पर पड़ता है। जिसके वाजिब दाम नहीं मिल पाते। बताया कि क्षेत्र के कई काश्तकारों ने महंगा कृषि ऋण लेकर फसल की बुआई की है। लेकिन बीते तीन साल से काश्तकारों को बड़े स्तर पर नुकसान उठाना पड़ रहा है।...

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