पांच करोड़ का बजट खपाया, फिर भी अधूरे पड़े शौचालय

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करौली. जिला प्रशासन ने करौली नगरपरिषद क्षेत्र को कागजों में करौली. जिला प्रशासन ने करौली नगरपरिषद क्षेत्र को कागजों में ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित कर राज्य सरकार से वाहवाही तो बटोर ली, लेकिन धरातल पर हालात इसके उलट हंै। (Swachh Bharat Mission flops in Karauli)) ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित कर राज्य सरकार से वाहवाही तो बटोर ली, लेकिन धरातल पर हालात इसके उलट हंै।

अब ओडीएफ घोषित करना परिषद को गले की फांस बन गई है। प्रदेश की गत भाजपा सरकार के समय गांव व शहरों को ओडीएफ घोषित करने के लिए अभियान चला था। नियमों के अनुसार खुले में शौच मुक्त होने व शौचालय निर्माण के भुगतान के बाद ही ओडीएफ घोषित होना था। सूत्र बताते हैं कि करौली में काफी प्रयास करने के बाद भी शौचालयों का निर्माण नहीं हो सका, जबकि राज्य सरकार की ओर से लगातार ओडीएफ की रिपोर्ट मांगी जा रही थी। ऐसे में जिला प्र्रशासन के दबाव में नवम्बर 2018 में नगरपरिषद ने पांच करोड़ रुपए की लागत से वार्डों में शौचालय व सामुदायिक शौचालयों का निर्माण शुरू कराकर ओडीएफ घोषित कर रिपोर्ट सौंप दी। लेकिन धरातल पर अभी तक एक भी कार्य पूरा नहीं हुआ है। किसी भी लाभार्थी को अंतिम किश्त तक नहीं मिली है। गौरतलब है कि गत दिनों खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री की मौजूदगी में कलक्ट्रेट में आयोजित बैठक में ओडीएफ मामले की समीक्षा करने पर चर्चा भी हुई थी।...

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