बागवानों को अपनी ओर नहीं खींच पाई चौरी बिहाल सब्जी मंडी

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पतलीकूहल/मनाली। मनाली के साथ सटी चौरी बिहाल सब्जी मंडी अस्तित्व में आने के एक दशक बाद भी पहचान नहीं बना सकी है। सालाना करोड़ों का कारोबार करने वाली मनाली की सब्जी मंडी से सेब सीजन में सफेद हाथी बन कर रह गई है। मनाली क्षेत्र के हजारों बागवान अपने उत्पाद को मनाली से सटी चौरी बिहाल सब्जी मंडी में बेचने के बजाए मीलों दूर पतलीकूहल-बंदरोल समेत अन्य सब्जी मंडियों में बेचते हैं। सेब को बेचते आए हैं। दिलचस्प बात यह है कि आज तक कोई भी चौरी बिहाल सब्जी मंडी के पिछड़ने की वजह नहीं समझ पाया है। जानकारों का मानना है कि चौरी बिहाल में एपीएमसी ने पक्की बिल्डिंग के साथ नीलामी मंच तक बनाया गया है। सुविधाओं के बावजूद चौरी बिहाल में न तो लदानी आते हैं और न ही आढ़ती। यहां चंद ही आढ़तियों ने पंजीकरण करवा रखा है। इतना जरूर है कि यहां पर सेब की बजाय कभी कभार सब्जियां जरूर भेजी जाती हैं। वहीं अरसे से लाहौल से आया आलू यहां स्टोर किया जाता रहा है। एपीएमसी के सचिव सुशील गुलेरिया का कहना है कि चौरी बिहाल सब्जी मंडी में अमूमन सभी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन शुरू से ही बागवान यहां सेब बेचने के प्रति ज्यादा उत्साहित नहीं रहे। सरकार का प्रयास होगा कि इसे भी अन्य सब्जी मंडियों की तर्ज पर विकसित किया जाए।...

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