अब्दुल हकीम हत्याकांड : प्रारंभिक जांच में नहीं मिले थे ऑनर किलिंग के सुराग

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अब्दुल हकीम हत्याकांड : प्रारंभिक जांच में नहीं मिले थे ऑनर किलिंग के सुराग

बुलंदशहर । अब्दुल हकीम हत्याकांड जनपद का बेहद चर्चित कांड रहा था। करीब दो महीने तक इस मामले में रोज नए मामले सामने आ रहे थे। जहां मृतक के परिजनों ने अब्दुल हकीम की ऑनर किलिंग का दावा किया था, वहीं पुलिस की विवेचना में ऑनर किलिंग की बजाय रंजिश का मामला निकला था। इसको लेकर परिजनों ने पुलिस पर आरोप भी लगाए थे। हालांकि पुलिस ने मामला रंजिश का ही बताते हुए चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी।

मुकदमे के विवेचक रहे तत्कालीन कोतवाली देहात प्रभारी आरके सिंह ने बताया कि 22 नवंबर 2012 को उनको फोन पर गांव भाटगढ़ी में युवक अब्दुल हकीम की गोली मारकर हत्या किए जाने की सूचना मिली थी। बाद में इसे ऑनर किलिंग का मामला बताया जाने लगा। अब्दुल हकीम की हत्या में सलमान, आसिफ, सरवर, गुल्लू और मलिक को नामजद किया गया था। निरीक्षक आरके सिंह के अनुसार उन्होंने पूरे मामले की ऑनर किलिंग, रंजिश समेत अन्य बिंदुओं पर जांच की। घटना में नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर गहन पूछताछ की गई। पूछताछ एवं तथ्यों के आधार पर घटना को रंजिशन अंजाम देने की पुष्टि हुई। मामले में सारे आवश्यक सबूत एकत्र किए गए। गवाहों के बयान कलमबंद करने के अलावा नामजद आरोपी की निशानदेही पर आला कत्ल बरामद किया गया। आलाकत्ल की फोरेंसिक जांच भी कराई गई, ताकि हत्यारोपियों को सजा मिलना सुनिश्चित हो। इसके बाद निर्धारित अवधि यानि 90 दिन के भीतर फरवरी 2013 को पांचों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी गई। पुलिस की गहन विवेचना एवं मजबूत पैरवी का ही परिणाम रहा कि मामले में आरोपियों को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

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