'आर्यन बाहरी थे'👥 झूठा निकला यह दावा!👎

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लगातार बाहरी आक्रांताओं से जूझते रहे हिंदुस्तान के खुद के वजूद पर सवाल उठाने वाले कुछ नामचीन इतिहासकारों की हरियाणा के राखीगढ़ी में खुदाई से मिले अह्म सबूतों के खुलासे के बाद नींद गायब हो सकती है, क्योंकि शोधकर्ताओं द्वारा किए गए ताजा खुलासे में उन पुराने दावों और थ्योरीज को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि भारत में आर्य बाहर से आए थे।

शायद आप जानते हैं ऐसे झूठे नरेशन गढ़ने वाले इतिहासकारों में एक नाम रोमिला थापर का भी है, जो डंके की चोट पर भारत के प्राचीन इतिहास पर लिखी अपनी किताब में आर्यों को आक्रमणकारी, आक्रांता और बाहरी बताती हैं। ताजा खुलासे ने अब शायद रोमिला थापर जैसे उन तमाम इतिहासकारों की पोल खोल दी है, जो खुद को अब तक महान इतिहासकार सूची में शामिल करवा चुके हैं। ताजा खुलासे के बाद लगता नहीं है कि रोमिला थापर को जेएनयू प्रशासन को अपनी सीवी भेजने की जरूरत भी पड़ेगी।

पिछले 28 वर्षों से जेएनयू में प्रोफेसर एमेरिट्स रहीं रोमिला थापर को ताजा खुलासे के निश्चित रूप से बगले झांकने के लिए मजबूर कर देगा, क्योंकि रोमिला थापर का 30-40 वर्षों का झूठा नरेसन अब एक्सपोज हो चुका है। अब सवाल उनके ऐतिहासिक तथ्यों पर खड़े हो गए हैं, जिसके दंभ पर रोमिला थापर जेएनयू जैसे शीर्ष विश्वविद्यालय में भविष्य को तैयार किया हैं। ताजा खुलासे के बाद नैतिक रूप से रोमिला थापर की प्रोफेसर एमेरिट्स पदवी भी खतरे में आ गई है, क्योंकि रोमिला थापर के ऐतिहासिक तथ्य 'आर्यन बाहरी थे' लगभग झूठा साबित हो चुका है।

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