उस पर्ची में ऐसा क्या था जिसे लेकर कांग्रेस ऑफिस से बाहर आए थे कमलनाथ और हार गया सिंधिया परिवार

  |   Bhopalnews

भोपाल. महीना था दिसंबर और साल था 1993। भोपाल में धूप खिली थी। वक्त दोपहर का था और मौसम सुहाना था तो कांग्रेस के दफ्तर 'इंदिरा भवन' के गलियारों में गहमा-गहमी थी। एक नेता हाथ में एक पर्ची लेकर कार्यालय से बाहर आता है। दौड़कर दिल्ली फोन करता है। फोन उठाते हैं तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंहा राव। उन्हें दो नंबर बताए जाते हैं। एसएल 56, डीएस 103 और उसके बाद फोन कट जाता है। माहौल में सन्नाटा पसर जाता है। एक राजा अपने ही रियासत के दो महाराजा को चुनौती देता है। साल था 1993 का और 2018। दोनों बार इस चुनौती में जीत मिलती है राजा को...पर सियासत का ये राजा मात भी खाता है, वनवास भी काटता है। चाणक्य की उपाधि भी दी जाती है पर एक साध्वी इसके...

फोटो - http://v.duta.us/33syLgAA

यहां पढें पूरी खबर— - http://v.duta.us/ZvmWqgAA

📲 Get Bhopal News on Whatsapp 💬