...और यहां पेड़ के नीचे पढ़ते हैं छात्र

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औड़िहार। शिक्षा क्षेत्र सैदपुर के प्राथमिक विद्यालय महिबुल्लाचक की स्थापना 1990 में की गई थी। विद्यालय का मुख्य भवन जर्जर होने के साथ ही उसके छत में दरारें तक पड़ी हैं। यहां केवल दो कमरों में पांच कक्षाओं का पठन-पाठन किया जाता है। बारिश के दिनों में इन्हीं दो कमरों में सभी छात्रों को बैठाया जाता है। जबकि अन्य दिनों में पेड़ के नीचे पढ़ाई की जाती है। विद्यालय में कुल पांच कक्षाओं के छात्रों को पढ़ाने के लिए दो शिक्षक तथा एक शिक्षामित्र की तैनाती की गई है।

प्राथमिक विद्यालय महिबुल्लाचक में छात्रों की संख्या भले ही 116 हो, लेकिन यहां बिजली, पानी और शौचालय की व्यवस्था तक नहीं है। पठन-पाठन के लिए शिक्षकों की भी कमी है। दो शिक्षक और एक शिक्षामित्र ही इस विद्यालय को संचालित कर रहे हैं। मजे की बात यह है कि विद्यालय में आजादी के बाद से अब तक बिजली आपूर्ति तक नहीं हुई है। यहां शौचालय भी जर्जर है। पानी की व्यवस्था न होने के कारण बच्चों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। देखा जाए तो विद्यालय में एक हैंडपंप हैं। वह भी लंबे समय तक खराब था। अब रीबोर हो गया है, लेकिन शुद्ध पानी नहीं देता। बालू युक्त पानी पीने से बच्चे घुटन महसूस कर रहे हैं। दूसरी तरफ विद्यालय के हैंडपंप के पानी की निकासी के लिए कहीं नाली न बनने से विद्यालय परिसर में ही गंदा पानी जमा हो जाता है। पानी जमा होने से विद्यालय में बदबू तक फैलती है और मच्छरों का भी प्रकोप बढ़ता जा रहा है। विद्यालय में एक दशक पूर्व शौचालय का निर्माण कराया गया था। यह वर्तमान में जर्जर है। यहां पानी की व्यवस्था न होने को छात्र शौचालय का महीनों से उपयोग नहीं कर रहे हैँ। विद्यालय प्रशासन भी इसे लेकर गंभीर नहीं है।

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