कम उम्र में बेटियों की शादी के बजाय उन्हें पढ़ाएं, मजबूत बनाएं अभिभावक

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मंडी। अभिभावक सोचते हैं कि बेटियों की जल्द शादी कर वे अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो गए, लेकिन यह गलत है। इसका समाज पर विपरीत असर पड़ता है। उन्हें बेटियों को पढ़ाना चाहिए, बेटियां किसी से कम नहीं हैं। हर क्षेत्र में लड़कों से आगे निकल रही हैं।

बेटियों को भी कम उम्र में शादी के लिए राजी नहीं होना चाहिए।

यह विचार तुंगल घाटी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बरयारा में प्रधानाचार्य हेमलता उपाध्याय ने अमर उजाला के ‘अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों के समक्ष रखे। उन्होंने महिला सशक्तीकरण के लिए अपराजिता मुहिम को सराहा।

कहा कि हमारी बेटियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से पीछे नहीं हैं। बेटियां हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। दुर्भाग्यपूर्ण कई अभिभावक बेटियों की छोटी उम्र में ही शादी करके अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त होकर उनके जीवन को अंधकारमय बना देते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण अनपढ़ता, आर्थिक स्थिति कमजोर, सामाजिक असुरक्षा एवं अनभिज्ञता भी हो सकती है। वहीं उन्होंने कहा कि 18 साल से पहले बच्ची की शादी करने पर मां बाप के लिए कानूनी सजा का भी प्रावधान है।...

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