कवाल कांड: आज तक इंसाफ का इंतजार, दंगे के मुकदमों में छह साल बाद भी नहीं मिली आरोपियों को सजा

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मुजफ्फरनगर में दंगे को छह साल बीत गए। दंगे के तमाम मुकदमे अदालत में चल रहे हैं, मगर छह साल बाद भी दंगे के किसी भी मुकदमे में एक भी दोषी को सजा नहीं हो सकी है। गवाहों के पक्षद्रोही होने के कारण मर्डर, रेप तक के मुकदमे से आरोपी छूट गए हैं। हत्याओं के एक दर्जन मुकदमे अभी सेशन कोर्ट में और अन्य मुकदमे निचली अदालत में विचाराधीन है। केवल कवाल कांड के ममेरे भाइयों सचिन-गौरव दोहरे हत्याकांड में ही सात आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हो सकी है।

जिले में छह साल पहले 27 अगस्त 2013 को हुआ कवाल कांड दंगे की वजह बना था। कवाल कांड के विरोध में 7 सितंबर को नंगला मंदौड़ की पंचायत के खत्म होते ही जिले में दंगा भड़क गया था। हजारों लोग बेघर हुए थे और 65 से अधिक लोग मारे गए थे। पांच सौ से अधिक मुदकमे दर्ज हुए थे। एसआईसी ने जांच के उपरांत 170 मुकदमों में चार्टशीट दाखिल की थी। बीते छह साल से मुकदमे कोर्ट में चल रहे हैं, मगर दंगे के किसी भी मुकदमे में आज तक एक भी दोषी को सजा नहीं मिल सकी है। मर्डर, रेप जैसे मुकदमे भी मौके के गवाहों के पक्षद्रोही होने के कारण लोग छूट गए हैं। वर्तमान में सेशन कोर्ट में एक दर्जन मुकदमे चल रहे हैं, जिनमें पुरबालियान, कुटबा-कुटबी, जौली, बहावड़ी, फुगाना, लिसाड़, लांक में हुई हत्याओं के भी शामिल है। इस वर्ष आठ फरवरी को केवल कवाल कांड के सचिन-गौरव हत्याकांड में सात आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हुई है।...

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