ग्राम विकास की राह में पद रिक्तता का अवरोध,26 प्रतिशत से ज्यादा ग्रामसेवकों के पद अब भी रिक्त

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जैसलमेर. भौगोलिक लिहाज से सबसे बड़े जैसलमेर जिले में ग्रामीण विकास और अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के संचालन में ग्राम विकास अधिकारी (ग्रामसेवकों) के लम्बे अर्से से खाली चल रहे पद बड़ी बाधा बनकर सामने आए हैं। पिछले दो साल के दौरान नए ग्रामसेवकों की भर्ती के बावजूद इस काडर के 26 प्रतिशत से ज्यादा पद भरे नहीं जा सके। हजारों किलोमीटर क्षेत्रफल वाले जिले के दूरदराज में फैले पंचायत क्षेत्रों में कई ग्रामसेवकों को अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाने की कोशिश की जा रही है। जिले की तीन पंचायत समितियों में कुल 140 ग्राम पंचायतें अस्तित्व में हैं। इनमें जैसलमेर और सांकड़ा समिति में 44-44 तथा सम समिति में 42 पंचायतें शामिल हैं। जैसलमेर समिति में 15, सम में 10 और सांकड़ा में 12 ग्रामसेवकों के पद रिक्त चल रहे हैं। पंचायतों के लिए ग्रामसेवकों की यह कमी विगत कई वर्षों से निरंतर चली आ रही है। ऐसे हालात में पंचायत समिति प्रशासन ग्रामसेवकों को अतिरिक्त पंचायतों का कार्यभार वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर देकर काम चलाने के लिए मजबूर है। पूर्व में कनिष्ठ लिपिकों से ग्रामसेवक का कार्य करवाने की व्यवस्था थी। जिसका प्रदेश स्तर पर ग्रामसेवक संघ ने विरोध किया तब राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर इस व्यवस्था को खत्म कर दिया। अब यदि किसी पंचायत में ग्रामसेवक का पद रिक्त है तो अन्य पंचायत के ग्रामसेवक को वहां अतिरिक्त प्रभार दिया हुआ है। इसका असर यह हुआ कि जिले के कई ग्रामसेवकों के पास दो-तीन पंचायतों का कार्यभार आ गया। जिसे समय पर निष्पादित करना उनके बूते से बाहर रहता है।...

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