छह साल बीते, बिन मुखिया सूनी हैं अंखियां

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छह साल बीते, बिन मुखिया सूनी हैं अंखियां

मुजफ्फरनगर। सात सितंबर 2013 का वो मनहूस दिन, जब कवाल कांड के विरोध में बुलाई गई महापंचायत में शामिल होने जाते लोगों पर हमले की प्रतिक्रिया स्वरूप जनपद में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी। शहर में भी भड़की नफरत की इस चिंगारी ने पत्रकार राजेश वर्मा समेत तीन लोगों की जान ले ली थी, जिसकी टीस पीड़ित परिजनों को आज तक सालती है। दंगे के बाद सरकार ने पीड़ित परिवारों के जख्मों पर मुआवजे का मरहम तो लगाया, लेकिन हमेशा के लिए बिछड़ चुके अपनों को याद कर आज भी आंसू ही बहते हैं।...

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