जंगल से मिली नवजात 34 दिन बाद डिस्चार्ज...शिशु गृह भेजा, 4 किलो वजन होने के बाद होगा कटे होठ का ऑपरेशन

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देवास. बागली-पुंजापुरा के बीच बरझाई घाट के जंगल में पिछले महीने निर्दयी मां द्वारा फेंकी गई मासूम अब पूरी तरह से स्वस्थ हो गईहै। करीब ३४ दिनों तक उसका उपचार जिला अस्पताल स्थित नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) में चला। शुक्रवार दोपहर मासूम को जब डिस्चार्ज किया गया तो स्टॉफ के कई सदस्यों की आंखों में आंसू आ गए। मासूम को फिलहाल उसके माता-पिता को नहीं सौंपते हुए शिशु गृह भेजा गया है। जब उसका वजन ४ किलो हो जाएगा तो कटे होठ का ऑपरेशन करवाया जाएगा। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर दी गईहै।

नवजात को डिस्चार्ज करते समय स्टॉफ के कई सदस्य व अन्य लोग उसके लिए उपहार लेकर पहुंचे। करीब १४-१५ जोड़ कपड़े बालिका के लिए लाए गए थे। डिस्चार्ज के दौरान कलेक्टर डॉ. श्रीकांत पांडेय भी मौके पर पहुंचे और बालिका की स्थिति की जानकारी डॉक्टरों से ली। उन्होंने बाल कल्याण समिति की पदाधिकारियों से कहा नवजात के प्रति अब आपकी जिमेदारी अधिक बढ़ गई है। नवजात के स्वस्थ होने व टीकाकरण के दस्तावेज भी अस्पताल प्रबंधन द्वारा बाल कल्याण समिति को दिए गए। गौरतलब है कि नवजात को जंगल में फेंके जाने के बाद ३ अगस्त की सुबह वह गंभीर हालत में मिली थी। कुछ घंटे बाद ही उसे देवास लाकर भर्तीकरवाया गया था। उसके शरीर पर चीटियों व अन्य कीड़ों द्वारा काटकर चोट पहुंचाई गई थी, नाक, कान आदि से दो दिनों तक कीड़े भी निकले थे। नवजात के बचने की उमीद डॉक्टरों को कम ही थी लेकिन धीरे-धीरे उसकी हालत बेहतर होती गई।डिस्चार्ज करते समय एसएनसीयू प्रभारी डॉ. वैशाली निगम सहित कई कर्मचारियों की आंखों में आंसू आ गए। एक माह से अधिक समय तक भर्ती रहने के दौरान इनको बालिका से विशेष लगाव हो गया था। कलेक्टर के साथ ही एसडीएम, सिविल सर्जन डॉ. अतुल पवनीकर आदि उपस्थित रहे।...

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