फसल अवशेष न जलाने वाले किसान वैज्ञानिकों से करेंगे संवाद

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फसल अवशेष न जलाने वाले किसान वैज्ञानिकों से करेंगे संवाद

बागपत। फसल अवशेष अब किसानों के लिए रामबाण साबित होने लगा है। धीरे-धीरे किसान जागरूक हो रहे हैं। अवशेष को खाद के तौर पर फसलों में इस्तेमाल कर रहे हैं। यह कार्य करने वाले 10 कृषकों का कृषि विभाग ने चयन किया है, जो नौ सितंबर को दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करेंगे। यहां देशभर के किसान इकट्ठा होंगे।

एडीओ कृषि महेश कुमार खोखर कृषकों को कार्यक्रम में प्रतिभाग कराएंगे। फसल अवशेष जलाने से जहां पर्यावरण को नुकसान होता है, वहीं कृषक भी इससे अछूते नहीं हैं। अवशेष जलाने से खेती की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है और मित्र कीट मर जाते हैं। इससे फसलों की उत्पादन क्षमता कम हो जाती है। जिसका सीधा नुकसान किसानों की आय पर पड़ता है। उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार ने बताया कि जिले के किसान लगातार जागरूक होते जा रहे हैं। जिले के 10 कृषक ऐसे हैं, जिन्होंने फसल अवशेष को उपयोग में लेना शुरू कर दिया है जो उनके लिए अब रामबाण साबित हो रहा है। फसलों की उत्पादकता बढ़ रही है। जिसके चलते इन किसानों को नौ सितंबर को दिल्ली भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र पूसा में भेजा जाएगा। यहां पर देशभर के किसान इकट्ठा होंगे। कृषि वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करेंगे। जो भी समस्या होगी उसका उपाए बताएंगे। किसानों को ले जाने की जिम्मेदारी एडीओ कृषि महेश कुमार खोखर को दी गई है।...

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