मीरा भारतीय सांस्कृतिक चेतना का प्रवाह करने वाली महान नारी थी

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उदयपुर. meera bai जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के मीरा अध्ययन एवं शोध पीठ की ओर से ''भक्ति साहित्य की प्रासंगिकता और मीराबाई विषयक व्याख्यान माला में शुक्रवार को मुख्य वक्ता केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा के निदेशक प्रो. नंद किशोर पाण्डे्य ने कहा कि संतों ने संस्कृत जैसी परिनिष्ठित भाषा की अपेक्षा सर्वमान्य लोक भाषा को साहित्य सृजन के लिए चुना। विद्यापति तुलसीदास, मीरा, नामदेव, रामानुज, कबीर, आलवार भक्तों के उदाहरण के माध्यम से भक्ति साहित्य में परम्परागत भाषा की तुलना में जनभाषाओ के महत्व को बताया।

जम्मू कश्मीर में खुलेंगे हिन्दी अध्ययन केंद्र

प्रो. पाण्डेय ने कहा कि जम्मू कश्मीर में हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए केन्द्रीय हिन्दी संस्थान की शाखाएं खोली जाएंगी। उच्च शिक्षा के साथ तकनीकी शिक्षा में हिन्दी की भूमिका बहुत सीमित हो गई है। उसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में यहां पर विदेशी छात्रों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। पहले यहा 39 देशो के विधार्थी आते थे वही अब 42 देशो के विधार्थी हिन्दी का अध्ययन कर रहे है। कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि भक्तिकाल की भांति वर्तमान संदर्भ में भी मीरा की प्रासंगिता है जिन्होने प्रेम को परम पुरूषार्थ के रूप में स्थापित कर भक्ति को लोक जन तक पहुंचाने का कार्य किया। नारी मुक्ति और सशक्तिकरण आंदोलन का सूत्रपात मीरा ने लगभग 500 वर्ष पुर्व ही कर दिया था।...

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