महीने में बस 3 से 4 दिन खुलता है यह स्कूल, दानदाता ने कहा जमीन वापस करे सरकार

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जमुई. एक तरफ जहां सरकारी तौर पर दावे किए जाते हैं कि सरकारी स्कूलों में बेहतर पढ़ाई और स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए स्कूल के बच्चों को मिड-डे-मील दिया जा रहा है. वहीं ऐसे में अगर कोई स्कूल बीते एक साल से सरकारी स्कूल नहीं बल्कि स्कूल के प्रभारी का निजी दालान जैसा हो जाए तो क्या होगा? दरअसल यहां स्कूल के प्रभारी का जब मन हुआ स्कूल आए जब मन नहीं हुआ नहीं आए. जमुई जिले का यह स्कूल सूबे का शायद एक मात्र स्कूल होगा जो महीने में मात्र तीन से चार दिन ही खुलता है.

स्कूल में हर दिन मिड-डे-मील बनाने वाली रसोइया आती है. वहीं स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे भी हर दिन तैयार होकर आते हैं, लेकिन स्कूल खुले इसका इंतजार घंटो कर वापस लौट जातें हैं. हैरानी की बात है कि कई बार शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब तो स्कूल बनने की जमीन दान में देने वाले कह रहें हैं जब स्कूल नहीं चलता तो सरकार जमीन लौटा दे....

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