शेरों ने लगाई इमामबाड़े में हाजिरी

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उमरिया. मोहर्रम की पांचवी तारीख को इमामबाड़ा में एहतराम, अकीदत और मोहब्बत के साथ परचम कुसाई की रस्म अदायगी की गई। तमाम जायरीन व अकीदतमंदो ने परचम कुसाई में शिरकत कर सबाबे दारेन हासिल किया। उल्लेखनीय है कि परचम कुसाई रस्म मोहर्रम की पंचमी को ही संपन्न की जाती है। शाम असिर बाद पांच बजे तमाम जायरीनों अकीदतमंदो ने परचम कुसाई रस्म में नारे तकवीर अल्लाहे अकबर की सदा बुलंद करते हुए दारूद फातहा में शिरकत कर हिस्सा लिया और बाद दुआ के तमाम जायरीनों को तबर्रूख व लंगर तकसीम किया गया।

भाव विभोर हुये बाबा के दिवाने

गंगा-जमुनी तहजीब का अजीमो शान मरकज इमामबाड़ा में मोहर्रम शरीफ की आज पंचमी के मौके पर परचम फहराने के पूर्व धनपुरी से आये मशहूर बैण्ड पार्टी ने शहीदाने कर्बला की शान पर इमामबाड़ा, गांधी चौक, विनोवा मार्ग, बखरी, कैम्प में मातमी धुन बजाकर पाली रोड होते हुये वापस इमामबाड़ा पहुंचा। धनपुरी से आये मशहूर बैण्ड पार्टी ने इमामबाड़ा परिसर में मातमी धुन बजाकर माहौल को रोमांचित कर दिया। वहीं मशहूर कलाम धुन बजाकर लोगो को स्तब्ध कर सुनने को मजबूर कर दिया। उपस्थित लोगो ने बैण्ड पार्टी के कलाकारो की खूब सराहना की इसके अलावा शेर का मातमी बाजा, ढोल ,तासे बजाये गये। बाबा हुजूर के चाहने वाले इस मौके पर काफी संख्या में मौजूद रहे। उमरिया नगर बांधवगढ़ नेशनल पार्क की वजह से मशहूर है, जहां हजारो सैलानी शेर देखने आते हैं। ऐसा ही नजारा इन दिनों उमरिया नगर में देखने को मिल रहा हैं। जहां मोर्हरम के अवसर पर युवा, बुजुर्ग, बच्चे शेर बनकर नाच रहे हैं। विदित हो कि मोर्हरम का यह मातमी पर्व जिसे हिन्दू, मुस्लिम भाई दोनों मिलकर मनाते हैं। जहां लोग शेर बनकर स्थानीय ईमामबाड़े में हाजरी लगाते हैं। उसके बाद यह टोली जान पहचान वालो के घर पहुंचती है। उनके पीछे पीछे लोगो हुजूम भी साथ मे रहता है। बताया जाता है जिनकी कोई मन्नत पूरी होती है, वे लोग शेर बनकर नाचते हैं।...

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