सफलता के बीज मंत्र, जरूर पढ़ें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित गुरनाम सिंह की यह बातें

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मैंने दूर दराज इलाकों में निष्ठा भाव से विद्यार्थियों की सेवा की। यह सिर्फ मेरा कर्तव्य ही नहीं था, मेरा धर्म भी था। बच्चों और उनके अभिभावकों को प्रेरित करना कि सरकारी स्कूलों के ढांचों और सेवाओं को भी बेहतर किया जा सकता है। कभी-कभी ऐसा भी महसूस हुआ कि विभाग में जो काम कर रहे हैं उसकी कदर नहीं है, लेकिन आज लग रहा है कि निष्ठाभाव से बच्चों की जो सेवा की थी वो सफल रही है।

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार हासिल कर लौटे गुरनाम सिंह का जम्मू कश्मीर पहुंचने पर स्वागत हुआ। कठुआ जिले के जसरोटा गांव निवासी मास्टर गुरनाम को जम्मू कश्मीर से इस वर्ष शिक्षक दिवस पर राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित किया गया था। गुरवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के अन्य चयनित बेहतरीन शिक्षकों के साथ मास्टर गुरनाम को भी इस पुरस्कार से नवाजा। शुक्रवार शाम गुरनाम अपने गांव जसरोटा पहुंचे तो स्वागत करने और बधाई देने वालों का भी तांता लगा रहा।...

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