सरकार की निगाहों से अछूते ये गांव...यहां खुद ग्रामीण लकड़ी के पुल बनाकर पार कर रहे रास्ता

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जैताराम विश्नोई

चितलवाना. अच्छी बारिश का हर किसी को इंतजार रहता है, लेकिन जिले के नेहड़ क्षेत्र के ग्रामीण प्रशासनिक व राजनीतिक उपेक्षा के चलते भगवान से बारिश नहीं होने की दुआ करते हैं। आजादी के सात दशक बाद भी सत्ता में आई सरकारें व राजनेता जिले के विकास को लेकर ढोल जरूर पीट रहे हैं, लेकिन नेहड़ के कई गांव आज भी गुलामों सी जिंदगी जी रहे हैं। जालोर जिले में ही नहीं, बल्कि मारवाड़-गोड़वाड़ में भी अगर अच्छी बारिश हो जाए तो नेहड़ के गांव चौतरफा पानी से घिर जाते हैं। हाल ही में पाली, बालोतरा व इसके आस पास के इलाकों में हुई अच्छी बारिश के बाद लूनी नदी में पानी की आवक हुई। लूनी नदी का यही पानी नेहड़ तक पहुंचने से कई गांवों का सम्पर्क एक-दूसरे से कट गया जो यहां के लोगों की यह सबसे बड़ी परेशानी है। हर बार सत्ता में आने वाली सरकारें गांवों के विकास के लिए योजनाएं बनाकर ऐसे इलाकों में पुलों का निर्माण करवाती हैं, लेकिन जालोर जिले के इस क्षेत्र पर आज तक किसी की नजर नहीं पड़ी है। नेहड़ के कई गांवों में आज के हालातों पर गौर करें तो कई रास्ते अभी भी बंद हैं। यहां के लोग कई किलोमीटर का सफर तय करने के बाद में उपखण्ड व पंचायत मुख्यालय तक पहुंच पा रहे हैं। जबकि कुछ गांवों में लोगों को खुद के स्तर पर लकड़ी के पुल बनाकर रास्ते पार करने पड़ रहे हैं। ये रास्ते जोखिम भरे हैं, पर नेहड़वासियों की मजबूरी इस जोखिम को भी हजम कर रही है।...

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