स्लम बस्ती के नाम पर बस गई पूरी 5 अवैध कॉलोनियां

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अनूपपुर। गरीबी रेखा से नीचे जी रहे गरीब परिवारों को बसाने के नाम पर १९९६ में आरम्भ की गई आवासीय योजना के तहत मुख्यालय स्थित तिपान नदी तट पर बसाई गई शांतिनगर कॉलोनी में अब अमीरों का कब्जा हो गया है। गरीबों की झुग्गी-झोपड़ी व मलिन बस्ती की जगह आलीशान पक्के भवन खड़े हो गए है। यहां तक कि कल तक शासन की पट्टेवाली जमीन पर अब निवासरत रहवासियों का अपना नक्शा खसरा चढ़ा हुआ है। लोगों की सुविधा के लिए नगरपालिका अनूपपुर शुरू से लेकर अंतिम छोर तक बने मकानों में जल, बिजली तथा सडक़ की सुविधा प्रदान कर रही है। शांतिनगर जैसी नगरपालिका क्षेत्र में स्लम बस्ती के नाम पर एक नहीं पूरे ५ कॉलोनियां स्थापित हो गई। जिसमें भूमिहीन परिवारों के नाम अमीरों ने अपने नाम जमीनों का पट्टा बनाकर उसपर अपना कब्जा जमा लिया है। जबकि वोट बैंक की राजनीति में रही सही कसर खुद नगरपालिका ने पूरी कर दी। यहां भूमिहीन परिवारों के नाम पीएम आवास योजना के तहत नगरपालिका ने एनजीटी और ग्राम नगर निवेश के नियमों के विपरीत नदी, तालाब और अन्य स्थानों पर भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान कर दी। नगरपालिका के अनुसार अनूपपुर नगरीय क्षेत्रांतर्गत लगभग ४-५ अवैध कॉलोनियां बसी हुई है। जिसमें शांतिनगर, पटौराटोला, चंदास टोला, उंजीर तालाब मेढ़ के चारों ओर लगभग आधा सैकड़ा मकान, सब्जी मंडी स्थित पटौराटोला। ये सारी कॉलोनियां शासकीय जमीन पर बसी है। लेकिन इनमें अधिकांश परिवारों के नाम खुद की जमीन का दस्तावेज है। बताया जाता है कि भू-माफियाओं ने गरीब परिवारों पैसे की लेन-देन पर फर्जी तरीके से उसे निजी जमीन के रूप में बेच दिया है। आंकड़ों में लगभग इन पंाच अवैध कॉलोनियोंं में लगभग दो सैकड़ा से अधिक परिवारों के पास शासकीय जमीन की बजाय निजी जमीन का दस्तावेज होगा। लेकिन नगरपालिका को यह तक पता नहीं है कि वहां निवासरत अधिकांश लोग आसपास के रसूखदार परिवारों से तालुल्क रखते हैं जिनकी अन्य वार्डों में भी मकान हैं। मामले में नगरपालिका ने भी ऐसे व्यक्तियों के चिह्नित करने के साथ उनके खिलाफ कार्रवाई करने से दूरी बना ली। परिणामस्वरूप दिनोंदिन शांति नगर सहित अन्य स्थानों पर स्लम बस्ती के नाम पर अवैध कॉलोनियां खड़ी हो गई है। नपा सूत्रों के अनुसार योजना के तहत भूमिहीन व बेघर परिवारों को अस्थायी तौर शासकीय जमीन का पट्टा दिलाते हुए शांतिनगर कॉलोनी क्षेत्र में कुल ८६ परिवारों को योजना का लाभ दिया गया था। जिसमें बाद में कुछ परिवार अन्यत्र चले गए। लेकिन उनकी खाली जगहों को अन्य लोगों ने कब्जा कर उसपर अपना मकान बना लिया। जबकि नियमों के अनुसार पट्टा अस्थायी होता है।...

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