हिमालय दिवस 2019: सुरक्षा की पुरानी परंपरा दरकिनार, नई तकनीक अपनाने को नहीं तैयार

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आपदा और हिमालय का गहरा नाता रहा है। अत्यधिक संवेदनशील पहाड़ पग-पग पर यहां बसने वालों की परीक्षा लेते रहे हैं। यही कारण है कि सौ साल के कई बड़े भूकंप को झेलने वाले कोटी बगान शैली के मकान यहां बनें, गांव सड़कों के किनारे नहीं, बल्कि नदियों, नालों से दूर ठोस चट्टानों पर बसे। लोगों ने जल प्रबंधन की बेहतरीन तकनीक विकसित की और खेती को भी इससे जोड़ा। यह भुलाया जा रहा है और आपदाओं से बचाव की नई तकनीकों को अपनाया नहीं जा रहा है....

अब आपदा के साथ जीना सीखने को नए सिरे से अपनाना जरूरी

केदारनाथ की आपदा ने देश और दुनिया का ध्यान उत्तराखंड की ओर खींचा था। 2013 की घटना से ही हमें यह अहसास हुआ कि आपदा की भयावहता कितनी हो सकती है। इसके बाद से ही आपदा प्रबंधन को नए सिरे से सोचने, समझने और अमल में लाने की जरूरत महसूस की गई। इतना होने पर भी हिमालय अब नए सिरे से आपदा प्रबंधन के पाठ को पढ़ने की मांग कर रहा है।...

फोटो - http://v.duta.us/CHkH2AAA

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