मैदान और संसाधन नहीं फिर भी मेजबानी का ठरका

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श्रीगंगानगर। जिला स्तरीय हो या फिर राज्य स्तरीय स्कूली खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन, मेजबानी के लिए सरकारी स्कूलों को प्राथमिकता दी जाती है लेकिन इन में से कई स्कूलों में खुद का मैदान तक नहीं होता। ऐसे में मजबूरन प्राइवेट स्कूल या संस्थान का मैदान या हाल उधार या मिन्नत निकलकर मांगना पड़ता है। मेजबानी का ठरका रखने के लिए प्रतियोगिता का शुभारंभ और समापन कार्यक्रम तो मेजबान स्कूल परिसर में होते है लेकिन मुकाबलों के लिए उधारे मांगे हुए मैदान या संस्थान पर जाकर करवाए जाते है। इसका परेशानी का सामना मेजबान स्कूल के साथ साथ खेलने आई टीमों के सदस्य और संबंधित शारीरिक शिक्षकों को भी भुगतना पड़ता है। इन शिक्षकों को टीमों को पहले मेजबान स्कूल में फिर जहां खेलकूद प्रतियोगिता हो रही है उस संस्थान या मैदान तक ले जाना पड़ता है। आवासीय सुविधा का प्रावधान है लेकिन छात्राओं को शहर के सरकारी स्कूलों में ठहराने की व्यवस्था नहीं हो पाती, ऐसे में संबंधित टीम के प्रभारी शिक्षक को अपने साथ ही वापस गांव या कस्बें में अपडाऊन करना पड़ता है। इन महिला शिक्षकों का कहना है कि छात्राओं की सुरक्षा की दृष्टि से वे वापस ले जाने को मजबूर है। हालांकि राज्य स्तरीय प्रतियोगिताअेां में वहां ठहरने की व्यवस्था बेहतर रहती है।...

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