यहां न कोई शिक्षा अधिकारी झांकता है और न ही किसी को परवाह,ग्रामीणों को अब केवल कलक्टर सा‘ब से ही उम्मीद

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जैसलमेर. शिक्षा के रूप में सदा से पिछड़े माने जाने वाले सरहदी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बने विद्यालयों की किस्मत आज तक नहीं बदल पाई है। यूं तो जिले में कई शिक्षा अधिकारी नियुक्त कर दिए हैं, लेकिन मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी का पद भी बना दिया, लेकिन किस्मत नहीं बदल पाई। जिम्मेदारों की लापरवाही से यह निराशाजनक स्थिति बनी है। कहीं आधारभूत सुविधाओं का अभाव तो कहीं शैक्षणिक व्यवस्था ही नहीं है। यही नहीं आजादी के 72 वर्ष बाद भी झोंपे में विद्यालय चल रहे हैं। कलक्टर की हिदायत के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी खानापूर्ति के नाम पर केवल शहर के समीपस्थ गांवों में या फिर सडक़ मार्ग के पास बने विद्यालय पहुंचकर निरीक्षण की खानापूर्ति कर रहे हैं। सरहदी बड़ी संख्या में ऐसे विद्यालय हैं, जहां लंबे समय से किसी अधिकारी ने झांका ही नहीं कि वहां क्या हो रहा है? दूसरी ओर शहर के समीपस्थ गांव या फिर सडक़ मार्ग के पास बने विद्यालय ही अधिकारी कई बार निरीक्षण कर कर्तव्य की इतिश्री कर चुके हैं। सरहदी जिले में अब मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी का पद भी बनाया गया हैं, लेकिन हकीकत यह है कि दूरस्थ गांवों, ढाणियों व नहरी क्षेत्र में बसे कई विद्यालयों की स्थिति राम भरोसे हैं। जिम्मेदारों की उदासीनता के बाद अब अपने बच्चों के भविष्य को लेकर परेशान ग्रामीणों को केवल जिला कलक्टर से ही उम्मीदें बची है।...

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