[katni] - सूचना के छह माह बाद भी नहीं बनीं बाल कल्याण समिति, शासन-प्रशासन की बड़ी बेपरवाही

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कटनी. बालकों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन और सरकार कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि पुरानी समिति के छह माह पहले रिमाइंडर दिये जाने के बाद भी बाल कल्याण समिति का गठन नहीं हुआ। इसका खुलासा सोमवार को उस समय हुआ जब पत्रिका ने रेस्क्यू किये गए बच्चों की सुरक्षा को लेकर हुई लापरवाही को उजागर किया। 11 फरवरी को पत्रिका ने 'बाल कल्याण समिति का कार्यकाल पूरा, इधर रेस्क्यू किए गए बच्चे अधर मेंÓ नामक शीर्षक से जिला प्रशासन, सरकार और बालकों की सुरक्षा का दावा करने वाले बालिका व बालक आश्रय गृहों की हकीकत उजागर की। बाल कल्याण समिति के पूर्व पदाधिकारी ने बताया कि बाल कल्याण समिति के गठन के लिए 6 माह पहले ही प्रक्रिया पूरी कर ली जानी थी। 6 माह पहले से ही समिति गठन के लिए कलेक्टर और सरकार को 2-2 माह में रिमाइंडर भेजे गए हैं। यदि इस दौरान किसी कारणवश समिति का गठन नहीं हो पाया था तो यह जिला प्रशासन की जवाबदेही बनती थी कि कटनी की सीडब्ल्यूसी (चाइल्ड वेलफेयर कमेटी) का प्रभार निकटतम जिले की समिति को दे देना था। लेकिन न तो मॉनीटरिंग करने वाले विभाग न और ना ही कलेक्टर केवीएस चौधरी ने इस ओर ध्यान दिया। जबकि बाल कल्याण समिति का कार्यकाल पूर्ण हो जाने पर उमरिया, पन्ना, सतना, जबलपुर, दमोह में प्रभार देकर रेस्क्यू किये गए बच्चों की काउंसिलिंग कराकर उन्हें मुख्य धारा से जोडऩा था।...

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